बॉलिवूडचे महानायक अमिताभ बच्चन सोशल मीडियावर प्रचंड सक्रिय असतात. ऑनलाईन ब्लॉग्स, ट्विट, फोटो आणि व्हिडीओजच्या माध्यमातून ते कायम चर्चेत असतात. मात्र यावेळी अमिताभ चक्क आपल्या कानांमुळे चर्चेत आहेत. त्यांनी आपल्या कानांचं मनोगत व्यक्त करणारी एक कविता पोस्ट केली आहे. त्यांची ही कविता सध्या सोशल मीडियावर सर्वांचेच लक्ष वेधून घेत आहे.

बिग बींनी आपल्या इन्स्टाग्राम अकाउंटवर कविता पोस्ट केली आहे. या कवितेद्वारे त्यांनी आपल्या कानांचं मनोगत सांगण्याचा प्रयत्न केला आहे. कान जर खरंच बोलू लागले तर ते काय बोलतील? स्वत:च्या समस्या कशा सांगतील? हे त्यांनी या कवितेद्वारे मांडण्याचा प्रयत्न केला आहे. “मैं हूँ कान… हम दो हैं… जुड़वां भाई…, लेकिन हमारी किस्मत ही ऐसी है, कि आज तक हमने अपने दूसरे, भाई को देखा तक नहीं” असे या कवितेचे बोल आहेत. बिग बींनी पोस्ट केलेली ही कविता सध्या सर्वांचेच लक्ष वेधून घेत आहे. काही तासांत शेकडो नेटकऱ्यांनी यावर आपल्या प्रतिक्रिया दिल्या आहेत.

 

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…कान की व्यथा…* मैं हूँ कान… हम दो हैं… जुड़वां भाई… लेकिन हमारी किस्मत ही ऐसी है कि आज तक हमने अपने दूसरे भाई को देखा तक नहीं … पता नहीं.. कौन से श्राप के कारण हमें विपरित दिशा में चिपका कर भेजा गया है … दु:ख सिर्फ इतना ही नहीं है… हमें जिम्मेदारी सिर्फ सुनने की मिली है.. गालियाँ हों या तालियाँ.., अच्छा हो या बुरा.., सब हम ही सुनते हैं… धीरे धीरे हमें *खूंटी* समझा जाने लगा… चश्मे का बोझ डाला गया, फ्रेम की डण्डी को हम पर फँसाया गया… ये दर्द सहा हमने… क्यों भाई..??? *चश्मे का मामला आंखो का है* *तो हमें बीच में घसीटने का* *मतलब क्या है…???* हम बोलते नहीं तो क्या हुआ, सुनते तो हैं ना… हर जगह बोलने वाले ही क्यों आगे रहते है….??? बचपन में पढ़ाई में किसी का दिमाग काम न करे तो *मास्टर जी हमें ही मरोड़ते हैं … जवान हुए तो आदमी,औरतें सबने सुन्दर सुन्दर लौंग, बालियाँ, झुमके आदि बनवाकर हम पर ही लटकाये…!!! *छेदन हमारा हुआ,* *और तारीफ चेहरे की …!* और तो और… श्रृंगार देखो… आँखों के लिए काजल… मुँह के लिए क्रीमें… होठों के लिए लिपस्टिक… हमने आज तक कुछ माँगा हो तो बताओ… कभी किसी कवि ने, शायर ने कान की कोई तारीफ की हो तो बताओ… इनकी नजर में आँखे, होंठ, गाल, ये ही सब कुछ है… *हम तो जैसे किसी मृत्युभोज की* *बची खुची दो पूड़ियाँ हैं..,* जिसे उठाकर चेहरे के साइड में चिपका दिया बस… और तो और, कई बार *बालों के चक्कर में* *हम पर भी कट लगते हैं* … हमें डिटाॅल लगाकर पुचकार दिया जाता है… बातें बहुत सी हैं, किससे कहें…??? कहते है दर्द बाँटने से मन हल्का हो जाता है… आँख से कहूँ तो वे आँसू टपकाती हैं…नाक से कहूँ तो वो बहाता है… मुँह से कहूँ तो वो हाय हाय करके रोता है… और बताऊँ… *पण्डित जी का जनेऊ,* *टेलर मास्टर की पेंसिल,* *मिस्त्री की बची हुई गुटखे की पुड़िया* सब हम ही सम्भालते हैं… और आजकल ये नया नया *मास्क* का झंझट भी हम ही झेल रहे हैं… कान नहीं जैसे पक्की खूँटियाँ हैं हम… और भी कुछ टाँगना, लटकाना हो तो ले आओ भाई… तैयार हैं हम दोनों भाई…!¡! pr pan

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